हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त करने के लिए सरकार की ओर से नशे के खिलाफ अभियान को धार देने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राजभवन पहुंचे। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को रिज मैदान पर आयोजित होने वाली वाकथन दौड़ में शामिल होने का न्यौता दिया। राज्य को नशामुक्त करने के लिए राज्यपाल शुक्ल के साथ मुख्यमंत्री और युवा शक्ति दौड़ेगी। प्रदेश सरकार ने नशे पर जोरदार प्रहार करने के लिए हाल ही में ठोस रणनीति तैयार की है। जिसके तहत घर-घर नशा पहुंचाने वाले तस्करों की धरपकड़ तेज करने का प्रण लिया गया है। सामान्य तौर पर प्रतिदिन प्रदेश के सभी नशा प्रभावित क्षेत्रों से ऐसे लोगों को पुलिस पकड़ रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरूद्ध सिंह व शिमला शहर के कांग्रेस विधायक हरीश जनारथा भी निमंत्रण देने के लिए साथ थे।
ऐसी जानकारी है कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने हंसते हुए राज्यपाल शुक्ल से विश्वविद्यालयों में नियुक्ति पर भी बात की। कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियमित नियुक्ति का विषय लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है। इस विषय पर राजभवन व सरकार के बीच में खींचतान भी दिखती रही है।
अरविंद दिग्विजय सिंह नेगी को कमान
प्रदेश सरकार ने अभी कुछ दिन पहले ही डीआईजी पदोन्नत हुए अरविंद दिग्विजय सिंह नेगी को टास्क फोर्स की कमान सौंपी है। नेगी पहले भी नशा कारोबारियों पर घातक चोट करते रहे हैं। इसीलिए सरकार ने उन्हें प्रदेश में नशे का विनाश करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी है।
राजभवन नशे के खिलाफ अभियान चला रहा
जहां एक ओर प्रदेश सरकार नशे को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, राजभवन ने स्कूलाें में बच्चों को नशा भगाने के लिए आगे आने का अभियान शुरू किया था। राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद शिव प्रताप शुक्ल ने दो साल पहले पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से इस अभियान की शुरूआत की गई थी। स्कूली बच्चों के साथ इस अभियान में महिलाओं की भागीदारी सराहनीय रही।



