हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी ने अपनी नई किताब मेरा हिमाचल, मेरी यात्रा: सुशासन की खोज में 38 वर्ष के जरिए न सिर्फ अपने प्रशासनिक अनुभवों का लेखा-जोखा पेश किया। बल्कि सत्ता और सिस्टम के कई अनसुने पहलुओं से भी पर्दा उठाया है। शुक्रवार को राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता द्वारा पुस्तक के विमोचन के बाद शनिवार को आशियाना रेस्तरां में आयोजित पत्रकार वार्ता में डा. बाल्दी ने साफ शब्दों में कहा कि मैंने पहले ही सरकारों को चेताया था कि भविष्य में बड़ा आर्थिक संकट आ सकता है, लेकिन तब किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। मैंने सरकार को साफ सुझाव दिया था कि यदि हिमाचल को आर्थिक संकट से उबारना है तो तीन सेक्टर हाइड्रो, पर्यटन और खनन पर फोकस करना होगा।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में यदि खड्डों की दीर्घकालीन नीलामी की जाए तो सरकार को अकेले इसी से सालाना 1000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है। डा. बाल्दी ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी नसीहत दी, यदि अधिकारी एकजुट रहें तो राजनेता गलत फैसले नहीं ले पाएंगे। उन्होंने प्रशासन को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यह समझाने की कोशिश की है कि नीतियां आम लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं।
40 हजार करोड़ मिले, फिर भी संकट क्यों?
डा. बाल्दी के अनुसार 14वें वित्त आयोग से हिमाचल को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिली थी। लेकिन दीर्घकालिक वित्तीय रणनीति न होने के कारण अब 16वें वित्त आयोग ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। नतीजा राज्य आज गंभीर आर्थिक दबाव झेल रहा है।
शांता कुमार सबसे बेहतरीन सीएम
तीन मुख्यमंत्रियों वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल व जयराम ठाकुर के साथ वित्त सचिव के रूप में काम कर चुके डा. बाल्दी ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार को सबसे प्रभावी नेता बताया। उन्होंने कहा कि शांता कुमार कड़े प्रशासक थे और उनके फैसलों में दूरदर्शिता साफ दिखती थी।

किताब नहीं, शासन की ‘इनसाइड स्टोरी’
डा. बाल्दी की यह पुस्तक महज संस्मरण नहीं, बल्कि हिमाचल के प्रशासनिक इतिहास की एक दस्तावेजी यात्रा बन गई है। इसमें उन्होंने वित्त, ऊर्जा, ग्रामीण विकास, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों को सरल लेकिन तथ्यात्मक अंदाज में रखा है। पुस्तक में 14वें वित्त आयोग की उपलब्धियां, ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट, जलविद्युत परियोजनाओं की पारदर्शी बोली प्रक्रिया और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी पहल का भी जिक्र है।
धारा 118 जरूरी, लेकिन… लचीलेपन की आवश्यकता
उन्होंने धारा 118 को हिमाचल के हित में जरूरी बताया। लेकिन यह भी कहा कि बड़े निवेश और रोजगार के लिए पर्यटन जैसे क्षेत्रों में लचीलापन अपनाना चाहिए।
किसके लिए खास है किताब?
यह किताब खास तौर पर प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी बताई जा रही है। कुल मिलाकर डा. बाल्दी की यह किताब हिमाचल के प्रशासनिक सिस्टम की ‘इनसाइड स्टोरी’ के साथ-साथ भविष्य के लिए एक चेतावनी और दिशा दोनों देती है, यदि अब भी नहीं संभले, तो आर्थिक संकट और गहराता जाएगा।



