वित्तीय संकट के कारण हिमाचल को रेलवे का हिस्सा छोड़ना पड़ा, मेडिकल पार्क अनुदान लौटाना पड़ा

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केंद्र सरकार को हिमाचल प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति से हिमाचल सरकार अवगत करवाती रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का सरकार के आला अधिकारियों के साथ दिल्ली दौरा इसी उद्देश्य के लिए था। केंद्र सरकार की ओर से किसी भी मोर्चे पर वित्तीय सहायता नहीं करने की स्थिति को देखते हुए हिमाचल सरकार ने निर्माणाधीन भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन में राज्य का हिस्सा चुकाने में असमर्थता जाहिर की है। इस संबंध में मंत्रिमंडलीय बैठक में सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। हिमाचल सरकार 1132 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी तब तक चुकाने की स्थिति में नहीं है, जबतक की प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधर नहीं जाती है। प्रदेश में रेल विस्तारीकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना में प्रदेश सरकार अभी तक 839.72 करोड़ की हिस्सेदारी कर चुकी है। राज्य की ओर से भूमि अधिग्रहण का पूरा खर्च उठाया गया है और निर्माण का 25 प्रतिशत भी हिमाचल सरकार के हिस्से में है।

मेडिकल डिवाइस पार्क स्वयं बनाएगा हिमाचल

सरकार ने मेडिकल डिवाइस पार्क स्वयं स्थापित करने का साहसिक निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार से मिले 30 करोड़ रुपये लौटाने का निर्णय लिया है। ये धनराशि भारत सरकार से अनुदान के तौर पर प्राप्त हुई थी। मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार का उद्योग विभाग स्वयं इस पार्क को स्थापित करेगा। इस पार्क के निर्माण के लिए सिडबी से ऋण लिया जाएगा। 7 वर्षों की अवधि में 500 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी। 350 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए भारत सरकार से 100 करोड़ मिलने थे और 250 करोड़ की हिस्सेदारी जमीन और अन्य खर्चों सहित प्रदेश सरकार के कंधों पर आनी थी। केंद्र सरकार ने 30 करोड़ रुपये तुरंत दिए थे और मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण कार्य शुरू होते ही 70 करोड़ की शेष धनराशि मिलनी थी।

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