दैनिक समाचार खाची ने संजय गुप्ता से पूछा, कब हटाएंगे डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट By Satlujtimes Staff - November 19, 2025 0 FacebookTwitterPinterestWhatsApp राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अनिल खाची ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को लिखा पत्र हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों के काम पर नाराजगी जताते हुए उनसे जवाब मांगा था। कुछेक जिला उपायुक्तों की ओर से आयोग को अपना जवाब भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने की वजह से चुनाव के कार्यों को नहीं कर पाए हैं। मतदाता सूची का प्रकाशन व चुनावी सामग्री को उठाने में देरी की वजह भी यही है। बुधवार को उपायुक्तों का जवाब मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने मुख्य सचिव से पूछा कि प्रदेश में बारिश का दौर थम गया है और अब स्थिति सामान्य हो चुकी है। ऐसे में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट को कब समाप्त किया जा रहा है। आयोग इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। अब मुख्य सचिव की ओर से जवाब आने के बाद ही इस मामले में आगामी कार्रवाई होगी। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत व शहरी निकाय चुनाव की तैयारियों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को देगा। राज्यपाल पिछले कुछ दिनों से राज्य से बाहर है वह वीरवार शाम को शिमला पहुंच रहे हैं। बैठक में नहीं आए थे अधिकारी राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावों की तैयारियों के सिलसिले में सचिव स्तर के अधिकारियों की बीते रोज बैठक बुलाई थी। बैठक में अधिकारी शामिल नहीं हुए थे। निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों को चुनावी सामग्री, बैलेट पेपर उठाने को कहा था। जिला उपायुक्तों ने यह सामग्री भी नहीं उठाई थी। चुनाव को लेकर तत्परता से कार्य न करने पर आयोग ने जिलाधीशों के कार्यों पर नाराजगी जताई थी। राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया पिछले साल ही शुरू कर दी थी।पंचायतों व शहरी निकायों के पूर्न: सीमांकन, नई पंचायतों के गठन को कहा गया था। इसके अलावा मतदाता सूची भी तैयार कर दी है। इस पूरी प्रक्रिया में 4 से 5 माह का समय लगता है। 2 रुपए का फार्म लेकर दर्ज करवा सकते हैं नाम राज्य चुनाव आयोग ने वोटरों से अपील की है कि हालांकि वोटर लिस्ट का प्रकाशन नहीं किया गया है, लेकिन वोटर लिस्ट आयोग की वेबसाइट और सारथी एप पर है। वह वहां पर अपना नाम देख सकते हैं। यदि उनका नाम इस सूची में नहीं है तो वह 2 रुपए के फार्म के साथ नाम दर्ज करने के लिए आवेदन दे सकते हैं। बंद 55 में से 42 स्थानों के लिए हैं वैकल्पिक सड़कें प्राकृतिक आपदा के चलते सड़कों के बंद होने का तर्क दिया गया है। आयोग ने जिलों से इस पर रिपोर्ट मांगी। इसमें पूछा गया था कि उनके जिला में कितनी सड़के बंद है। 55 के करीब सड़के बंद बताई गई थी। इसको लेकर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता से अलग से रिपोर्ट मांगी गई। विभाग ने कहा है कि 55 में से 42 के करीब सड़के ऐसी है जो वैकल्पिक मार्ग से जुड़ी है। यानि वहां जाने के लिए दूसरी सड़क भी है। यहां के लिए पैदल भी आया जा सकता है। मुख्य सड़क कोई भी बंद नहीं है। पंचायत व वार्ड के पुनर्गठन के 23 प्रस्ताव आए पंचायतों के पुनर्गठन (री-ऑर्गेनाइज) के लिए पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग को 23 प्रस्ताव मिले हैं। जिलों से ये प्रस्ताव पंचायती राज विभाग को आए हैं। शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिला के डीसी की तरफ से ये प्रस्ताव भेजे गए हैं। विभाग ने इन प्रस्तावों को सरकार को भेजा है। चूंकि आयोग अब पुनर्गठन की प्रक्रिया पर रोक लगा चुका है, राज्य चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता के एक क्लॉज को लागू कर चुका है। जिसके तहत पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं फ्रीज कर दी है। इससे, सरकार चाहकर भी पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन (डिलिमिटेशन) नहीं कर पाएगी। सरकार भी ले रही कानूनी सलाह राज्य सरकार चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर सरकार के स्तर पर भी मंथन शुरू हो गया है। सरकार भी इस पर कानूनी राय ले रही है। आयोग का तर्क है कि यदि अब पुनर्गठन व पुनः सीमांकन किया जाता है तो वाेटर लिस्ट नए सिरे से बनानी पड़ेगी। सीमाएं बदल जाती है। सरकार तर्क दे रही है कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने की वजह से पंचायतों व वार्डों का पुनर्गठन नहीं हो पाया था। ये उठ रहे सवाल चुनाव में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जो जिले प्राकृतिक आपदा का तर्क दे रहे हैं वहां पर शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई हो रही है। मेले, अन्य तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चुनाव के लिए ही प्राकृतिक आपदा का तर्क दिया जा रहा है।