बाहरी राज्यों में इलाज पर 1000 करोड़ खर्च होने से चिंतित मुख्यमंत्री

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स्वास्थ्य ढांचा सुदृढ़ करने को सरकार का फोकस
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को एम्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है। बाहरी राज्यों में इलाज पर हिमाचली हर वर्ष करीब 1,000 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए राज्य के अस्पतालों में मजबूत स्वास्थ्य अधोसंरचना तैयार की जा रही है। शिमला व टांडा सहित प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनरी बदलने का कार्य तेजी से चल रहा है। पुरानी मशीनों के कारण मरीजों की जांच में देरी और उपचार में जटिलताएं बढ़ रही थीं, इसलिए सरकार ने व्यापक स्तर पर उपकरणों के आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है।
आधुनिक 1.5 और 3 टेसला एमआरआई मशीनें होंगी स्थापित
सुक्खू ने बताया कि आईजीएमसी शिमला, मंडी, नाहन, चंबा और एआईएमएसएस चमियाना में हाई-रेज़ोल्यूशन 1.5 टेसला और 3 टेसला एमआरआई मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे गंभीर बीमारियों की जांच अत्यंत सटीक और तेज़ होगी तथा मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
पंजाब-हरियाणा से पहले हिमाचल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पंजाब और हरियाणा से पहले रोबोटिक सर्जरी सुविधा उपलब्ध करवाने वाला राज्य बन गया है। अब तक रोबोटिक तकनीक से करीब 70 सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं।
एआईएमएसएस चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर आईजीएमसी शिमला में भी रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा।

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