-पल्स पाेलियो अभियान के कारण अब चार मार्च को नहीं सात से सामूहिक अवकाश
-अढाई घंटे तक सुबह 9.30 से 12 बजे तक जारी है पेन डाउन स्ट्राइक
हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों व अस्पतालों में चिकित्सकाें की अढाई घंटे सुबह 9.30 से 12 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक के कारण मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लंबी-लंबी कतारों में लगने के बाद भी खाली हाथ वापिस लौटना पड़ रहा है। उधर चिकित्सकों ने उनकी मांगे न माने जाने पर 7 मार्च से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी जारी की है। पहले चिकित्सक चार मार्च से सामूहिक अवकाश पर जा रहे थे लेकिन पल्स पोलियो अभियान के कारण अब मांगे न माने जाने पर सात मार्च से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी ह।
राज्य के किसी भी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक सुबह 9.30 बजे से 12 बजे तक मरीजों को ओपीडी में नहीं देख रहे हैं। ऐसे में दूर दराज से आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में भारी भरकम राशि देकर उपचार करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। चिकित्सक 12 बजे के बाद ही आपीडी में आ रहे हैं तब तक मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई रही हैं। चिकित्सक एनपीए यानी नान प्रैक्टिस अलाउंस के बंद होने और पदोन्नतियां न होने व अन्य मांगों के पूरा न होने के कारण नाराज हैं। इसे लेकर बीते वर्ष 2023 में चिकित्सक लंबी हड़ताल कर चुके हैं। चिकित्सकों को वेतन का बीस प्रतिशत एनपीए मिलता है। इसका उद्देश्य चिकित्सीय सेवाओं को प्रोत्साहित करना है। यह भारत सरकार की सिफारिश पर सभी राज्यों में दिया जाता है। प्रदेश की माली हालात के कारण इसे बंद करने का निर्णय लिया था।
ये हैं प्रमुख मांगे
-चिकित्सकों के पदोन्नति के बहुत कम पद स्वीकृत है। 4-9-14 एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम दी जाती थी, इसे पुनः बहाल किया जाए।
– डायनेमिक करियर प्रोग्रेशन स्कीम को केंद्र सरकार के तुल्य लागू किया जाए। बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की तरह प्रदान की गई है।
– नियमित डीपीसी और पदोन्नति की जाए।
-एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक को दिया जाए।
– पुनः रोजगार प्रदान नहीं किया जाए।
– उप स्वास्थ्य निदेशक और खंड चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त पद भरे जाएं।



