पीएम के 1,500 करोड़ की घोषणा ‘पत्थर की लकीर’, 5,500 करोड़ की मदद कहां खर्च हुई, सरकार बताए

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आपदाग्रस्त मंडी में 3 साल का जश्न मनाने के बहाने मोदी के साथ मुझे कोसेंगे मुख्यमंत्री : जयराम

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित मंडी जिला में कांग्रेस सरकार अपने तीन वर्ष पूरे होने पर जश्न मनाकर “राजनीतिक लाभ” उठाना चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्हें (जयराम ठाकुर) को कोसने का मंच तैयार कर रहे हैं, लेकिन “वास्तविक विकास और राहत कार्यों” पर सरकार चुप है। जयराम ठाकुर ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता ‘पत्थर की लकीर’ है और यह रकम हर हाल में हिमाचल को मिलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि “वर्तमान सरकार को आपदा मद में अब तक मिले 5,500 करोड़ रुपये आखिर कहां खर्च हुए?” उन्होंने वर्ष 2023 की भीषण आपदा का हवाला देते हुए कहा कि उस समय सरकार ने 4,500 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था, लेकिन 300 करोड़ भी खर्च नहीं हुए, जो सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वास्तव में आपदा पीड़ितों की चिंता करते, तो सबसे पहले उनके बीच जाते, न कि जश्न का मंच सजाते।

3 साल के जश्न पर उठाए सवाल

जयराम ठाकुर ने कहा कि जब राज्य में हजारों लोग अभी भी राहत के इंतजार में हैं, तब सरकार का मंडी में जश्न मनाना “संवेदनहीनता” है। उन्होंने कहा कि यदि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा में थोड़ी भी संवेदना है, तो उन्हें इस जश्न से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी भी आपदा एक्ट लागू है और ऐसे में सरकार को पूरा ध्यान राहत व पुनर्वास कार्यों पर देना चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यक्रमों पर।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर हार के डर से पंचायत चुनाव टालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में पहुंच चुका है और चुनाव आयोग ने भी सीमाओं में छेड़छाड़ के मामले में सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की बात सामने आना “अवांछित और संदिग्ध” है।

आपदा के ताजा आंकड़ों पर चिंता

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस साल की भीषण आपदा में 480 लोगों की मौत हुई, 41 लोग अभी भी लापता हैं, 30 हजार से अधिक पशु-पक्षी मारे गए,
1800 मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए, जबकि 8,300 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच माह बीतने के बाद भी सड़कों, पुलों और पेयजल योजनाओं की मरम्मत अधूरी है और प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है।

घटनास्थलों पर न पहुंचने का आरोप

जयराम ने बिलासपुर की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें बस की छत पर पहाड़ गिर गया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वहां पीड़ितों से मिलने तक नहीं पहुंचे। इसी तरह, सुंदरनगर और कई अन्य स्थानों के आपदा प्रभावितों की भी सरकार ने सुध नहीं ली।

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