हिमाचल में बेरोजगारी दर में वृद्धि होने का खुलासा किया गया

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नेशनल सेंपल सर्वे संगठन की श्रम बल सर्वे रिपोर्ट में भी प्रदेश में बेरोजगारी की दर में वृद्धि होने का खुलासा हुआ है। बढ़ती बेरोजगारी की दर से साफ प्रतीत होता है कि रोजगार को चुनावी ऐजेंडा में शामिल करने के बावजूद प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद राजनीतिक दल अपने इस चुनावी वादे को पूरा करने में नाकाम रहते हैं। नेशनल सेंपल सर्वे संगठन के आंकड़े हिमाचल प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर और भी भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। संगठन की बीते साल की दूसरी तिमाही अर्थात जुलाई से सितंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बेरोजगारी दर 33.9 फीसदी थी। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश में सर्वाधिक बताई गई थी। इस अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 17.3 फीसदी रही।

आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने भी माना था

राज्य सरकार के साल 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ी है। साल 2021-22 में प्रदेश में 4 फीसदी बेरोजगारी की दर सर्वेक्षण में बताई गई है, मगर 2023-24 में यह दर बढ़ कर 4.4 फीसदी हो गई। सर्वेक्षण के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में महिलाएं तथा शहरी इलाकों में पुरुषों में बेरोजगारी दर अधिक है। शहरों में 30.6 फीसदी युवा रोजगार की तलाश में हैं। ग्रामीण इलाकों में 3.8 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी की दर कम होने की वजह महिलाओं व पुरुषों का खेती के साथ साथ पशुपालन व मनरेगा में काम करना मानी जा रही है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक बीते साल जनवरी से दिसंबर तक एक लाख 9083 बेरोजगारों ने रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण करवाया। 2022 में पंजीकरण करवाने वाले बेरोजगारों की संख्या एक लाख 41 हजार से अधिक थी।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों में से सिर्फ 0.2 फीसदी अर्थात 257 युवाओं को सरकारी तथा 6983 को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला। 2022 में सरकारी क्षेत्र में 821 बेरोजगारों को प्रदेश में सरकारी रोजगार मिला। सरकारी क्षेत्र में रोजगार के आंकड़े कम होने की वजह नियमित भर्तियों के बजाय आउट सोर्स पर तैनाती का नया प्रचलन है।

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