मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट कहा है कि हिमाचल, हिमाचलियत और हिमाचली हकों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। हिमाचल हमारी मिट्टी, हमारे सपनों और हमारे स्वाभिमान की धरती है, इसकी रक्षा हर कीमत पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश की अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर डटकर लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने निवेश के नाम पर सौदेबाजी की और प्रदेश की जमीनें औने-पौने दामों पर पूंजीपतियों को सौंप दीं। आईपीआर विभाग के फेसबुक पेज पर मुख्यमंत्री के हवाले से साझा संदेश में कहा गया है कि हिमाचल की पवित्र पर्वतों की धरती मेहनतकश, ईमानदार और संघर्षशील लोगों की भूमि है। हिमाचली अपनी मिट्टी, अपने हकों और स्वाभिमान के लिए हमेशा अडिग रहते हैं, लेकिन पिछली सरकार ने बाहरी पूंजीपतियों के लिए लूट के दरवाजे खोल दिए थे।
उन्होंने कहा कि अब हिमाचल बिकेगा नहीं। राज्य के हकों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ी जाएगी और जीत भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि कड़छम-वांगतू जल विद्युत परियोजना में प्रदेश को अधिक राजस्व प्राप्त होना इसी दिशा में बड़ा कदम है। इसके अलावा प्रत्येक जल विद्युत परियोजना में राज्य के हिस्से की रक्षा के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी है। वाइल्ड फ्लावर हाल मामले में न्याय मिलना भी हिमाचल के हक की जीत का प्रतीक है।
सीएम ने वित्त विभाग की नब्ज टटोली
शिमला पहुंचते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर मौजूदा वित्तीय हालात की समीक्षा की। वर्ष 2025-26 प्रदेश सरकार के लिए आर्थिक दृष्टि से बड़ी चुनौती वाला वर्ष साबित हो रहा है। सूत्रों के अनुसार दिसम्बर तक प्रदेश सरकार को ऋण लेने की सीमा 7 हजार करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें से अब तक 6,900 करोड़ रुपये का ऋण लिया जा चुका है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर प्रदेश हित में ऋण सीमा में दो प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग कर चुके हैं। फिलहाल सरकार को हर माह लगभग 2,800 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध देनदारियों का निपटारा करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल देने के निर्देश दिए।



