पहली बार किसी सरकार ने अपने बूते तीन साल में 26683 करोड़ का राजस्व अर्जित किया: सुखविन्द्र सिंह सुक्खू

0

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने ठोस और परिणामोन्मुख कदम उठाए हैं। बीते तीन वर्षों में राज्य ने अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो पिछली भाजपा सरकार के औसत राजस्व से 3,800 करोड़ रुपये अधिक है। इसे वित्तीय सुधारों और नीति-स्तर पर लिए गए साहसिक निर्णयों का परिणाम बताया। सरकार ने आय बढ़ाने के साथ-साथ खर्च नियंत्रण पर भी जोर दिया है। अब सभी जनप्रतिनिधियों, जिनमें विधायक भी शामिल हैं, को हिमाचल भवन और राज्य अतिथि गृहों में सामान्य दरों पर किराया देना होगा। इसके अलावा निविदा प्रक्रिया की समय-सीमा 51 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है।

2027 तक आत्मनिर्भर, 2032 तक सबसे समृद्ध राज्य का लक्ष्य

सभी पहलों से स्पष्ट है कि सरकार वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए आर्थिक सुधारों, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और कर्ज के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

शराब ठेकों की नीलामी से राजस्व में उछाल

सत्ता में आते ही सरकार ने शराब ठेकों के लिए नीलामी-सह-निविदा प्रणाली लागू की। इससे राज्य को 5,408 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पिछली सरकार के समय यह आय मात्र 1,114 करोड़ रुपये थी। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने नीलामी से बचते हुए केवल लाइसेंस शुल्क में 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ नवीनीकरण की नीति अपनाई, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।

विरासत में मिला कर्ज और घटता केंद्रीय अनुदान

कांग्रेस सरकार को पूर्व भाजपा सरकार से 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज और 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कर्मचारियों की देनदारियां विरासत में मिलीं। राज्य की आय का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कर्ज चुकाने में जा रहा है, जिसमें 12,266 करोड़ रुपये ब्याज और 8,087 करोड़ रुपये मूलधन शामिल हैं। केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को वर्ष 2025-26 में घटाकर 3,256 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि 2021-22 में यह 10,249 करोड़ रुपये था। इससे राज्य की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ी हैं।

वाइल्ड फ्लावर हाल फैसले से बड़ी राहत

23 वर्षों से लंबित वाइल्ड फ्लावर हाल संपत्ति विवाद में अक्टूबर 2025 में उच्च न्यायालय का फैसला राज्य के पक्ष में आया। मशोबरा रिसार्ट्स लिमिटेड का स्वामित्व राज्य सरकार को मिलने से करीब 401 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ हुआ है, जिसमें 320 करोड़ रुपये की बैंक जमा और शेयर होल्डिंग्स शामिल हैं। इसके अलावा राज्य को हर साल 20 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी।

जलविद्युत परियोजनाओं से बढ़ेगी आय

सरकार के प्रयासों से कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में राज्य की रायल्टी 12 से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद इससे राज्य को प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। इसके साथ ही जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भूमि पट्टे की अवधि 99 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष कर दी गई है। इससे धौलासिद्ध (66 मेगावाट), लुहरी चरण-1 (210 मेगावाट) और सुन्नी (382 मेगावाट) परियोजनाएं 40 वर्षों बाद राज्य को वापस मिलेंगी। जोगिंदरनगर की शानन परियोजना के स्वामित्व को लेकर भी सरकार सक्रिय प्रयास कर रही है।

चंडीगढ़ संपत्तियां और बीबीएमबी बकाया

चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल के 7.19 प्रतिशत वैध हिस्से को प्राप्त करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके साथ ही बीबीएमबी से लंबित ऊर्जा बकाया की वसूली को लेकर भी कार्रवाई तेज की गई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here