– सीबीआइ ने जिला अदालत में कहा-तिलक राज के खिलाफ हिमाचल सरकार से प्रासिक्यूशन सेंक्शन नहीं मिली, इसलिए आरोपमुक्त किया जाए
सात साल पूर्व सीबीआइ ने हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग के सहायक निदेशक तिलक राज शर्मा को रिश्वत मामले में आरोप मुक्त करने को कहा है। सीबीआई ने तिलक राज को सेक्टर-8 चंडीगढ़ से पकड़ा था। लेकिन अब सीबीआइ यह केस बंद कर देगी। सीबीआइ की ओर से जिला अदालत में कहा गया है कि तिलक राज के खिलाफ हिमाचल सरकार से प्रासिक्यूशन सेंक्शन नहीं मिली, इसलिए उन्हें आरोपमुक्त किया जाए। हालांकि कोर्ट की ओर से इस मामले में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया गया है।
इस संबंध में सीबीआइ ने विशेष अदालत में एक अर्जी दायर की है, जिसमें जांच एजेंसी ने अदालत से मांग की है कि तिलक राज को आरोपमुक्त किया जाए और उसके साथ पकड़े गए बिचौलिए अशोक कुमार राणा के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। सीबीआइ ने तिलक राज को चंडीगढ़ के एक उद्योगपति की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता का कहना था सब्सिडी के मामले में उनसे रिश्वत मांगी थी।
सीबीआइ का आरोप है कि उनके पास तिलक राज के खिलाफ पर्याप्त सबूत है लेकिन सरकार ने कई दलीलें देते हुए तिलक राज पर केस चलाने की मंजूरी ही नहीं दी जिस वजह से मजबूरी में सीबीआइ को उसके खिलाफ केस बंद करना पड़ रहा है।
कांग्रेस-भाजपा दोनों सरकारों ने नहीं दी मंजूरी
सीबीआइ ने जुलाई 2017 को इस मामले में चार्जशीट दायर की थी। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार ने केस चलाने की मंजूरी यानी प्रासिक्यूशन सेंक्शन नहीं दी। तब हिमाचल में कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन सीबीआइ ने इस केस की आगे जांच जारी रखने की मांग की जिसे अदालत ने मंजूर कर दिया था। सीबीआइ ने दोबारा जांच की और सरकार से सेंक्शन मांगी। लेकिन नवंबर 2022 को हिमाचल सरकार ने फिर से सेंक्शन नामंजूर कर दी। तब राज्य में भाजपा की सरकार थी। जिसके बाद अदालत ने सीबीआइ से जवाब मांगा था कि वे तिलक राज के खिलाफ केस में स्पष्टीकरण दें। ऐसे में सीबीआइ ने अब अदालत में रिपोर्ट दे दी और आरोपित को आरोपमुक्त करने की मांग की।
ये है मामला…
सीबीआइ ने 29 मई 2017 को तिलक राज शर्मा और अशोक कुमार राणा को एक बिजनेसमैन चंद्रशेखर की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। चंद्रशेखर बद्दी की एक फार्मा कंपनी के मालिक थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कंपनी की 50 लाख रुपये की सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के लिए तिलक राज शर्मा ने उनसे 10 लाख रुपये रिश्वत मांगी। जिसमें से 5 लाख रुपये की पहली किस्त चंडीगढ़ में देनी थी। उनकी शिकायत पर सीबीआइ ने तिलक राज को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया और उसे रंगें हाथों पकड़ लिया। साथ में अशोक कुमार राणा भी गिरफ्तार हुआ।



