
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आइआइटी से पास होने के बाद दूसरे आइआइटी (इनिशिएटिव, इंप्रूव और ट्रासंफार्मेशन) को अपनाने पर ध्यान देना होगा। नए कार्य के लिए पहल करनी होगी। उसमें सुधार से बदलाव अपने आप महसूस करेंगे। छात्रों को तकनीकी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करके भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में योगदान देना होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के 16वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा, रोबोटिक, ड्रोन, आर्टिफिशियल टेक्नोलाजी (एआइ), साइबर फायर बाल्स, क्वांटम व अन्य तकनीकों में बहुत कुछ करने की संभावना है। आइआइटी रक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, पर यह दिल मांगे मोर।’ आइआइटी मंडी से मेडिटेशन टेक्नोलाजी में और अधिक काम करने उम्मीद है। भारतीय सेना गोला बारूद में 88 प्रतिशत आत्मनिर्भर हुई। लगभग 65 प्रतिशत हथियार हम खुद बना रहे और उनका निर्यात भी कर रहे। इनका निर्यात 23,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा है, 2029 तक इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। एयरक्राफ्ट के इंजन भी देश में बनेंगे।


