आर्थिक सर्वेक्षण: हिमाचल में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा, विकास के बीच बढ़ीं चुनौतियां

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हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था जहां एक ओर तेज गति से आगे बढ़ती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर रोजगार और आपदाओं से जुड़ी चुनौतियां सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आए आंकड़े इस विरोधाभास को साफ तौर पर दर्शाते हैं। बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 10.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह स्थिति संकेत देती है कि प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पा रहे हैं। साल 2024-25 में 65,132 युवाओं ने रोजगार के लिए रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण करवाया। लेकिन इनमें से केवल 4,559 को ही निजी क्षेत्र में नौकरी मिल सकी। सरकारी क्षेत्र में भर्ती की रफ्तार पहले ही धीमी पड़ चुकी है, जिससे समस्या और गहराती जा रही है।

स्टार्टअप योजना में भी सीमित उत्साह

सरकार की राजीव गांधी स्टार्ट अप योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसमें अपेक्षित उत्साह नहीं दिख रहा। अब तक केवल 56 युवाओं ने ई-टैक्सी खरीदी हैं, जिन पर सरकार ने 3.95 करोड़ रुपये का उपदान दिया है। इसके अलावा 3,717 युवाओं को 56 लाख रुपये से अधिक बेरोजगारी भत्ता और 2,764 युवाओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान करीब 33 लाख रुपये का भत्ता प्रदान किया गया।

आपदाओं से अर्थव्यवस्था प्रभावित

प्रदेश में बीते चार वर्षों के दौरान प्राकृतिक आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार इस अवधि में करीब 46 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4 प्रतिशत वार्षिक के बराबर है।

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