राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने जानकारी दी है कि राज्य के शिमला सहित कई जिलों में ओलावृष्टि के कारण कई क्षेत्रों में सेब और अन्य स्टोन फ्रूट की फ्लोरिंग पर असर पड़ा है। ओलावृष्टि से बागवानों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उसके बाद ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में बागवानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सचिवालय में मीडिया प्रतिनिधियों से बात करते हुए राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि कृषि और बागवानी मौसम के प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से प्रभावित होने का सिलसिला लगातार बन गया है। उन्होंने किसानों और बागवानों से फसल बीमा योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि इस योजना के तहत 20 दिसंबर अंतिम तिथि होती है। किसान व बागवान समय पर बीमा करवाते हैं तो प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई संभव है।
उन्होंने बताया कि सेब के एक पौधे पर करीब 73 रुपये प्रीमियम देना होता है, जबकि ओलावृष्टि से सुरक्षा के लिए 23 रुपये अतिरिक्त देकर लाभ लिया जा सकता है। इसके तहत किसानों को 24 से 425 रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर स्थापित मौसम केंद्रों के जरिए निगरानी की जाती है और उसी आधार पर नुकसान का आकलन होता है। किन्नौर जिले में वर्ष 2023-24 के दौरान इस योजना के तहत करीब 43 करोड़ रुपये किसानों को वितरित किए जा चुके हैं।
प्रशासन ने बंद सड़कों को खोलने और बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए टीमें तैनात कर दी हैं। लोगों को खराब मौसम के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।



