हिमाचल प्रदेश निजी बस आपरेटर संघ ने प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि स्पेशल रोड टैक्स (एसआरटी) के नाम पर निजी बस चालकों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जबकि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) पर वर्ष 2008 से करोड़ों रुपये बकाया होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। संघ के प्रदेश महासचिव रमेश कमल ने शिमला में बयान जारी कर कहा कि संविधान का समानता का नियम सभी पर लागू होना चाहिए।
निजी बस चालकों को टैक्स में मामूली देरी पर भी परमिट रोकने, नोटिस भेजने और प्रशासनिक कार्रवाई की धमकियां दी जा रही हैं। वहीं, एचआरटीसी पर वर्ष 2008 के बाद से एसआरटी जमा न करने के बावजूद विभाग मौन साधे हुए है। सरकार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि निगम पर कुल कितना एसआरटी बकाया है और उसकी वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी आपरेटर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आपरेटर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
उन्होंने कहा कि डीजल के बढ़ते दाम, स्पेयर पार्ट्स की महंगाई, बैंक ऋण और बीमा प्रीमियम के भारी बोझ के बीच निजी बस आपरेटर दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। एचआरटीसी बसों में महिलाओं को 50 प्रतिशत किराया छूट जैसी योजनाओं से निजी आपरेटरों की आय में भारी गिरावट आई है। संघ कल्याणकारी योजनाओं के विरोध में नहीं है, लेकिन इसके आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए निजी क्षेत्र को भी समानांतर राहत दी जानी चाहिए।
स्थिति स्पष्ट हो
संघ चाहता है कि एचआरटीसी के लंबित एसआरटी भुगतानों का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। निजी चालकों को भेजे जा रहे अनावश्यक नोटिसों की समीक्षा कर कार्रवाई रोकी जाए। निजी परिवहन उद्योग के लिए वित्तीय राहत पैकेज और व्यावहारिक नीति बनाई जाए।

