शिमला से दलाईलामा की नगरी के लिए चलने वाली हवाई सेवा से हिमाचल सरकार को सालाना 10 से 11 करोड़ का चूना लग रहा था, इस हवाई सेवा में कभी भी 10 या इससे अधिक लोगों ने एकसाथ सवारी नहीं की। जबकि प्रतिदिन सुबह दिल्ली से शिमला आने वाली उड़ान आगे धर्मशाला जाती थी और वहां से वापस लौटती थी। शिमला को दिल्ली से जोड़ने वाली एकमात्र हवाई सेवा पहली नवंबर से बंद हो गई है। अलायंस एयर की ओर से इस हवाई सेवा का संचालन किया जा रहा था। 25 सितंबर को तीन साल की अवधि पूरी होने पर दिल्ली-शिमला हवाई सेवा बंद हो चुकी है। इसके साथ ही आगे प्रदेश में शिमला से धर्मशाला के लिए होने वाली हवाई उड़ान भी स्वत: बंद हो गई है। देश में हिमाचल प्रदेश एकमात्र राज्य है, जहां की राजधानी के लिए एक भी हवाई सेवा नहीं है। तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने हवाई सेवा के लिए अलायंस एयर कंपनी के साथ एमओयू किया था। उड़ान योजना के तहत संचालित हो रही हवाई योजना को निकट भविष्य में शुरू करने के लिए अभी तक प्रदेश सरकार की ओर से अलायंस एयर के साथ कोई बातचीत नहीं की गई है।
प्रति सीट के आधार पर सबसिडी की व्यवस्था थी
इस हवाई सेवा में प्रति सीट और दैनिक उड़ान के आधार पर सबसिड़ी का निर्धारण होता था। दिल्ली से शिमला के लिए हवाई जहाज में 23 सीटें सबसिड़ी वाली होती थी और शिमला से दिल्ली लौटते हुए सबसिड़ी वाली सीटों की संख्या 13 थी। सामान्य तौर पर 48 सीटर एटीआर-42-600 में दिल्ली से शिमला आने वाले यात्रियाें की संख्या 26 रहती थी और वापसी में सीटों की संख्या 21 या 23 रखी जाती थी। ऐसा इसलिए था कि हवा के अधिक दबाव के कारण ऐसी व्यवस्था की गई थी। दिल्ली से शिमला और वापसी उड़ान के लिए प्रदेश सरकार को मासिक 50-60 लाख रुपये सबसिडी का भुगतान करना पड़ता था।
कुल्लू की सेवा बंद करके धर्मशाला चलाई
2023 से पहले हवाई जहाज की उड़ान सप्ताह में चार दिन कुल्लू के लिए होती थी और शेष तीन दिनों के लिए धर्मशाला। लेकिन सरकार ने मंत्रिमंडल बैठक में कुल्लू की हवाई उड़ानों को बंद करके सप्ताह के सभी दिन धर्मशाला के लिए उड़ान शुरू की। पहले दोनों स्थानों के लिए होने वाली हवाई उड़ान पर होने वाला कुल खर्च 10-11 करोड़ था। उसके बाद धर्मशाला के लिए होने वाली हवाई उड़ान पर ही इतना खर्च राज्य सरकार को हर साल उठाना पड़ रहा था।

