हिमाचल में बढ़ती बेरोजगारी बनी चिंता, तीन साल में दर में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि

0

हिमाचल प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी सरकार और युवाओं दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। बीते तीन वर्षों में प्रदेश में बेरोजगारी की दर में दो प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष की अंतिम तिमाही में प्रदेश में युवा बेरोजगारी दर 29 प्रतिशत से अधिक रही।

सरकारी विभागों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की संख्या और उनके स्थान पर होने वाली भर्तियों के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है। आर्थिक तंगी के चलते सरकार नियमित भर्तियों के बजाय आउटसोर्स और जाब ट्रेनी के माध्यम से पद भरने की नीति पर अधिक निर्भर हो गई है। इससे अस्थायी रोजगार मिलने से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।

प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजगार कार्यालयों के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या करीब सात लाख तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष लगभग 60 हजार नए युवा इस सूची में जुड़ रहे हैं। बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि रोजगार के अवसर सीमित हैं।

राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद सरकार के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वित्त विभाग की प्रस्तुति के दौरान भी यह स्पष्ट किया गया था कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार न होने अथवा केंद्र से विशेष सहायता न मिलने की स्थिति में दो वर्षों से खाली पड़े पदों को भरना मुश्किल हो सकता है।

प्रदेश में नियमित भर्तियां मुख्य रूप से लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के माध्यम से होती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन संस्थाओं के माध्यम से भर्तियों की गति धीमी रही है। पिछले तीन वर्षों में इन दोनों संस्थाओं के जरिए करीब तीन हजार पद ही भरे जा सके हैं। इसके विपरीत कई विभागों में पद आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से भरे गए हैं। आउटसोर्स भर्ती का मुद्दा विधानसभा में भी गूंज चुका है।

नियमित भर्तियों की कमी के कारण शिक्षित बेरोजगारों की उम्मीदें प्रभावित हो रही हैं। इसके बावजूद प्रदेश के युवा 21 मार्च को पेश होने वाले मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के चौथे बजट से रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बेरोजगारों को आशा है कि बजट में हजारों खाली पदों को नियमित आधार पर भरने की घोषणा हो सकती है, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here