हिमाचल प्रदेश में 13 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने रिकार्ड निस्तारण दर दर्ज करते हुए न्यायिक इतिहास में एक नई उपलब्धि जोड़ी है। राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन और लंबित मामलों के निपटारे के लिए 128 बेंचों का गठन किया गया। इन बेंचों के समक्ष कुल 1,28,711 मामले रखे गए, जिनमें से 83,325 मामलों का निपटारा किया गया। इस प्रकार लोक अदालत ने 64.75 प्रतिशत का अब तक का सबसे उच्च निपटान प्रतिशत हासिल किया। लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न दावों में लगभग 75.03 करोड़ की राशि का निर्धारण कर दावेदारों को पुरस्कृत किया गया। यह उपलब्धि न केवल न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने में सहायक सिद्ध हुई। बल्कि आम जनता को त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हुई।
ट्रैफिक मजिस्ट्रेट न्यायालयों में मोटर वाहन चालान व मामलों के लिए ई-पे (ई-कोर्ट डिजिटल भुगतान) के माध्यम से कंपाउंडिंग शुल्क की आनलाइन सुविधा भी प्रदान की गई, जिससे वादियों को बड़ी राहत मिली। राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए संदेशों, जिंगल, आईईसी सामग्री के वितरण के साथ-साथ स्थानीय निकायों, गैर-सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं, पैरा लीगल वालंटियरों और अन्य प्रचार माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव रंजीत सिंह ठाकुर ने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक एवं प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षण तथा न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में यह आयोजन प्रदेश की सभी अदालतों में किया गया। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन सफल रहा। जिसने लोक अदालत तंत्र की प्रभावशीलता को एक बार फिर प्रमाणित किया।

