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राजनीति में कोई दुश्मन नहीं हाेता है और न ही कोई दोस्त, हमेशा दरवाजे खुले रहते हैं: चंद्र कुमार

प्रदेश में चल रहे ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सात मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ विधानसभा पहुंचे। विधानसभा में अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के साथ मुलाकात की और सभी ने चाय की चुस्कियां ली, उसके बाद मुख्यमंत्री और सभी मंत्री लौट आए। मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ विधानसभा गए सात मंत्रियों में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, चंद्र कुमार, कर्नल धनीराम शांडिल, रोहित ठाकुर, अनिरूद्ध सिंह, राजेश धर्माणी, यादवेंद्र गोमा शामिल थे। वरिष्ठ मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद अध्यक्ष से मिलना नहीं हुआ था। बजट था तो अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया अत्यधिक व्यस्त थे। ऐसे में आज हम सभी मुख्यमंत्री के साथ उनके पास मिलने के लिए पहुंचे। चंद्र कुमार ने मंत्रिमंडल की बैठक शनिवार को टालने के संबंध में कहा कि मुख्यमंत्री सोलन जिला के कसौली विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर गए थे और वहां पर आयोजित कार्यक्रमों में अधिक समय लगने के कारण देरी से शिमला पहुंचे। जिसके चलते मंत्रिमंडल की बैठक अब कल होगी।

उन्होंने कहा कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह गत रोज मंत्रिमंडल बैठक में शामिल थे और कुछ आइटम होने के बाद मुख्यमंत्री से अनुमति लेकर किसी आवश्यक कार्य के लिए चले गए थे। चंद्र कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से हटाए गए 6 कांग्रेस विधायकों के संबंध में लिखा कि इन विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं हाेता है और न ही कोई दोस्त, दरवाजे खुले रहते हैं।

विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्त किए गए विधायकों के संदर्भ में उनका कहना था कि उनके सामने न्यायालय का दरवाजा खुला है।

ऐसा भी संभावित हो सकता

अटकलें हैं कि 6 कांग्रेस विधायकों की सदस्यता अयोग्य घोषित करने के निर्णय पर संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान पुर्नसमीक्षा याचिका विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को दे सकते हैं। उसी सूरत में अध्यक्ष कांग्रेस के 6 विधायकों को अयोग्य करार दिया गया है, उस मामले को ट्रिब्यूनल की शक्तियों के तहत समीक्षा कर सकते हैं और सदस्यता बहाल हो सकती है। इसके अतिरिक्त अयोग्य करार दिए गए पूर्व विधायक अपने कृत्य के लिए क्षमा याचना करते हैं तो भी, उसके अतिरिक्त न्यायालय में याचिका डालने पर न्यायालय विधानसभा अध्यक्ष को मामले की सुनवाई दोबारा करने के निर्देश दे सकता है। इन दो विकल्पों के अतिरिक्त विधानसभा अध्यक्ष स्वयं अपने निर्णय की समीक्षा नहीं कर सकता है।

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