पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री जिस रास्ते पर चल रहे हैं, न वह काम अच्छा है और न ही उसका अंजाम अच्छा होगा।” उन्होंने चेताया कि सत्ता स्थायी नहीं होती और सत्ता के दुरुपयोग का जवाब समय देता है। देवभूमि हिमाचल की राजनीति हमेशा विकास पर आधारित रही है, न कि प्रतिशोध पर। लेकिन वर्तमान सरकार कांग्रेस छोड़ चुके विधायकों और निर्दलीयों को सत्ता के बल पर प्रताड़ित करने में जुटी है। “जो विधायक मुख्यमंत्री का साथ नहीं देंगे, क्या उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा?”
पुलिस पार्टी बन गई, विभाग मौन क्यों?
हमीरपुर विधायक आशीष शर्मा के खिलाफ खनन मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई माइनिंग विभाग करता है, शिकायत भी वही दर्ज करता है, लेकिन इस मामले में पुलिस स्वयं पार्टी बन गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक को लगातार थाने बुलाकर दिनभर बैठाया जा रहा है और जानबूझकर ऐसी धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें जमानत न मिल सके। जयराम ठाकुर ने कहा कि यह मामला केवल आशीष शर्मा का नहीं, बल्कि उन सभी नौ विधायकों का है, जिन्होंने “इस निकम्मी सरकार का साथ देने से इनकार कर दिया।”
भाजपा नेताओं पर चुन-चुनकर कार्रवाई
उन्होंने आरोप लगाया कि केएल ठाकुर, राजेंद्र राणा, इंद्रदत्त लखनपाल, सुधीर शर्मा, चैतन्य शर्मा, देवेंद्र भुट्टो और रवि ठाकुर सहित कई भाजपा नेताओं और उनके परिवारों को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा है। “घर की नापजोख, मूल्यांकन, नोटिस, फर्जी शिकायतें—हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। सिरमौर में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी पर हत्या के प्रयास का मामला, देहरा में निर्दलीय विधायक होशियार सिंह के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई और शिमला भाजपा जिला अध्यक्ष के परिवार पर दर्ज दर्जनों मामलों को भी उन्होंने सरकार की बदले की नीति का उदाहरण बताया।
कांगड़ा कार्निवल पर सवाल: पैसा मांगा, खाता नंबर क्यों नहीं?
कांगड़ा कार्निवल को लेकर जयराम ठाकुर ने सरकार पर सीधा सवाल दागा। उन्होंने कहा कि यदि यह अधिसूचित सरकारी कार्यक्रम है, तो इसके लिए जनता से पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं? उन्होंने पूछा “पत्र जारी हुआ, लेकिन उसमें आधिकारिक खाता नंबर क्यों नहीं दिया गया? क्या यह कैश वसूली का प्रयास है? उन्होंने यह भी कहा कि अगर दान लिया जा रहा है तो दानदाताओं को आयकर छूट का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही पूर्व में कांग्रेस नेताओं पर सांस्कृतिक आयोजनों में फर्जी बिल और उगाही के आरोपों की याद भी दिलाई।
आईपीआर विभाग को चेतावनी: डोंट क्रॉस द लिमिट
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPR) पर टिप्पणी करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि विभाग को भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार में लगाया जा रहा है।
उन्होंने भाजपा के चुनाव चिन्ह को उल्टा दिखाने वाले पोस्ट का जिक्र करते हुए अधिकारियों को सीधी चेतावनी दी—
“सरकार के साथ अपना भविष्य मत जोड़िए, दो साल बाद जब सरकार नहीं होगी तब क्या होगा, यह भी सोचिए। डोंट क्रॉस द लिमिट।”
आपदा राहत के मंच से धमकियां?
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि आपदा राहत के पैसे से मनाए गए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने खुले मंच से धमकियों की भाषा का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों को आपदा में अपनों की लाश तक नहीं मिली, आज वही लोग थानों में बैठाए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कहती है कुछ लोग छूट गए थे, उनकी पहचान अब कांग्रेस का नेता कर रहा है।
अवैध कटान और खनन पर सरकार की चुप्पी क्यों?
नेता प्रतिपक्ष ने बंजार और धर्मपुर में अवैध कटान के मामलों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि जहां सत्ता समर्थित नेताओं के नाम सामने आए, वहां जांच और कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई, जबकि भाजपा नेताओं को चुन-चुनकर फंसाया जा रहा है।
नतीजा अच्छा नहीं होगा
अंत में जयराम ठाकुर ने दो टूक कहा कि बदले की भावना से की गई राजनीति न पहले सफल हुई है, न आगे होगी।
चेतावनी देते हुए कहा कि यह न हिमाचल की संस्कृति है और न ही यहां के लोगों की प्रवृत्ति। सरकार को अभी भी संभल जाना चाहिए।

