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केंद्रीय करों में हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा हिमाचल का भविष्य

गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही हिमाचल सरकार के लिए राजस्व घाटा अनुदान संजीवनी का काम करती आ रही है। इसकी वजह से सरकार के ऊपर दबाव भी कम रहा है। लेकिन अब राजस्व घाटा अनुदान 16वें वित्तायोग में कितना मिलेगा, यह केंद्रीय करों में हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा। हिमाचल प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों को 2026 से कितनी धनराशि का निर्धारण होगा, यह वित्तायोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। प्रदेश सरकार चाहती है कि राजस्व घाटा अनुदान में किसी तरह की कटौती न हो। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से वित्तायोग के अध्यक्ष डा. अरविंद पानगढ़िया के समक्ष तर्क दिया गया है कि राजस्व घाटा अनुदान में वृद्धि की जाए, क्योंकि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य होने के साथ विशेष दर्जा प्राप्त भी है।

इसलिए हमें प्राथमिकता दें

सरकार का मत है कि राजस्व घाटा अनुदान पहाड़ी राज्य के लिए जीवन रेखा है, इससे ही प्रदेश में विकास का पहिया चलता है। इसके साथ-साथ विशेष श्रेणी राज्य है और अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। पहाड़ी भोगोलिक क्षेत्र होने के कारण आधारभूत ढांचागत विकास में भिन्नता रहती है। कृषि जोत भूमि सीमित है, भवन निर्माण व मुरम्मत महंगी, महंगी सेवाएं और जीवन यापन महंगा है। ऐसे में राजस्व घाटा अनुदान प्रदेश के लिए महत्व रखता है। प्रदेश सरकार ने वित्तायोग के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया था कि छह कारण है, जिन्हें वित्तायोग अपनी सिफारिशें देते हुए राज्य का ध्यान रखे।

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