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हिमाचल प्रदेश की आबकारी नीति दिल्ली की शराब घोटाले की तरह: जयराम ठाकुर

– जयराम ठाकुर ने बजट पर चर्चा के दौरान हंसते हुए पूरा समय सरकार पर निशाना साधा

अगले वित्त वर्ष के बजट पर चर्चा शुरू करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आबकारी नीति के मामले में सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश की आबकारी नीति दिल्ली की शराब घोटाले की तरह है। दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में हुए शराब घोटाले के कारण दिल्ली सरकार के तीन मंत्री जेल में हैं। आबकारी नीति के मामले में हिमाचल प्रदेश के हालात भी दिल्ली सरकार की तरह नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आबकारी नीति में बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है।

सदन में बजट पर सामान्य चर्चा में भाग लेने के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने प्रदेश की आबकारी नीति को लेकर कई तरह के संदेह व्यक्त किए। बजट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लोक निर्माण एवं जल शक्ति विभाग सहित सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों को पिछले 14 महीनों से भुगतान रोक दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर ठेकेदारों को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के अतिरिक्त उनसे हिस्से की मांग की जा रही है। अब तो सरकार स्वयं मान रही है कि राज्य के हालात श्रीलंका जैसे हो रहे हैं। शायद यही वजह है कि सरकार गारंटियों पर काम करना छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा पेश किए गए बजट से निराशा हाथ लगी है और सुक्खू सरकार के मंत्री भी निराश है। ऐसे में आम आदमी, युवा बेरोजगार, किसान, बागवान एवं कर्मचारी सहित आम आदमी परेशान है। राज्य की विकास दर 7.1 फीसदी रहने का दावा गलत है और बजट में झूठे पेश किए गए हैं।

राज्य को हरित राज्य बनाने की घोषणा के तहत ई-बसों, ई-ट्रक खरीदने के लिए प्रदेश के एक भी बेरोजगार को उपदान नहीं मिला है। महिलाओंं को हर महीने 1500 रुपये देने की गारंटी झूठी निकली। प्रदेश के जनजातीय लाहुल-स्पीति की महिलाओं को पिछले साल से 1500 रुपये देने की अधिसूचना तक जारी कर दी गई थी, लेकिन एक भी महिला को ये धनराशि नहीं मिली।

कांग्रेस सरकार तो महाठग निकली

बजट पर चर्चा करते हुए जयराम ठाकुर ने ठगने पर चल रहे परस्पर संवाद को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री तो भाजपा नेताओं को ठग कहते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार तो महाठगी निकली। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में ओपीएस कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन अंतिम वेतन का 25 फीसदी तक पहुंच सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस सरकार की बुनियाद झूठ पर टिकी है, वह अपनी गारंटियों को 10 जन्म में भी पूरा करने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने वाले न तो कर्मचारी-पेंशनरों को डीए-एरियर दे रहे हैं और न ही बिजली बोर्ड सहित अन्य निगम-बोर्ड में पुरानी पेंशन को बहाल किया गया है। प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। जो विकास हो रहा है, वह केवल केंद्रीय योजनाओं के सहारे चल रहा है। उनका ये भी कहना था कि प्रदेश में निवेश लाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वास्तविकता ये है कि निवेशक आते नहीं, राज्य से बाहर जाते दिख रहे हैं।

एक लाख नौकरियोंं का वादा कहां गया

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस पार्टी ने हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था। यानि पांच साल में पांच लाख लोगों को नौकरियां दी जाएगी। लेकिन एक साल से अधिक का समय गुजर चुका है और हजारों तो छोड़िए, सैंकड़ों नौकरियां नहीं दी गई। याद कीजिए विधानसभा में पहला बजट पेश करते हुए 30 हजार नौकरियां देने की घोषणा हुई थी, नौकरियां की घोषणा कोरी साबित हुई और अगले वित्त वर्ष के लिए पेश बजट में तो नौकरियों का जिक्र तक नहीं किया गया है।

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