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उच्च न्यायालय ने आरबीआई को झूठा धोखाधड़ी टैग हटाने का आदेश दिया, आवेदक को 25,000 रु. का पुरस्कार दिया

प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऋण का भुगतान करने के बाबजूद वेब पोर्टल से धोखाधड़ी की प्रविष्टि न हटाने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पर 25,000/- रु कॉस्ट लगाई है। साथ ही न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को उसके द्वारा बनाए गए एक्सबीआरएल पोर्टल से प्रार्थी के खाते के नाम के सामने से ‘धोखाधड़ी’ की प्रविष्टि को हटाने का निर्देश दिया। आदेशों की अनुपालना दस दिन के भीतर करने के आदेश दिए गए है।

उपरोक्त अवधि के भीतर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को कॉस्ट का भुगतान करने के आदेश जारी किए गए है। मामले के अनुसार प्रार्थी ने पंजाब नेशनल बैंक से कर्ज लिया था। प्रतिवादी-बैंक पंजाब नेशनल बैंक के बीच विवाद के निपटारे के बावजूद प्रार्थी द्वारा प्रतिवादी-बैंक को संपूर्ण ऋण चुका दिया था। प्रार्थी के अनुरोध पर शुरू में अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रतिवादी-बैंक द्वारा जारी नहीं किया गया। अंततः इसे प्रार्थी को प्रतिवादी-बैंक द्वारा 19.01.2024 को जारी किया गया। इसके बाद प्रार्थी ने अन्य बैंको से लोन सुविधा प्राप्त करने के लिए संपर्क किया। इन बैंकों ने प्रार्थी को सूचित किया कि उसका नाम/खाता रिजर्व बैंक द्वारा बनाए गए एक्सबीआरएल पोर्टल पर ‘धोखाधड़ी’ के रूप में प्रदर्शित किया गया है और उक्त कारण से, उन्होंने प्रार्थी को लोन देने में असमर्थता व्यक्त की। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी का पंजाब नेशनल बैंक में खाता था।

प्रार्थी ने 14.06.2017 को पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लिया। उसके द्वारा सितंबर, 2022 में सारा लोन चुका भी दिया। हालांकि लोन की अवधि के दौरान प्रार्थी और प्रतिवादी-बैंक द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस के पास कई शिकायतें की। मगर पुलिस द्वारा शिकायतों की जांच करने पर यह पाया गया कि प्रार्थी और प्रतिवादी-बैंक के बीच विवाद दीवानी प्रकृति का था। विवाद में कोई आपराधिकता नहीं पाई गई। पुलिस ने 07.08.2021 को इस बाबत अपनी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। इसके बाबजूद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए एक्सबीआरएल पोर्टल से प्रार्थी के खाते के नाम के सामने से ‘धोखाधड़ी’ की प्रविष्टि को नहीं हटाया गया। मजबूरन प्रार्थी को हाईकोर्ट में मामला दाखिल करना पड़ा।

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