प्रदेश में सरकार के पास अभी भी लगभग 600 नई पंचायतों के लिए आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। हालांकि सरकार इतनी संख्या में नई पंचायतें नहीं बनाएगी। लेकिन फिर भी 18 मार्च तक नई पंचायतों को बनाने का सिलसिला जारी रह सकता है। बुधवार को राज्य के पंचायती राज सचिव सी पालरासू ने सभी जिला उपायुक्तों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की है और जिला उपायुक्तों को पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों से फीडबैक भी लिया। उन्होंने अदालत के आदेशों का सख्ती से अनुपालन करने के निर्देश दिए। सभी जगहों पर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जाए।
माना जा रहा है कि पंचायती राज विभाग 22 मार्च तक सभी पंचायतों के लिए चुनावी रोस्टर जारी कर देगा। इस रोस्टर में पता चलेगा कि इस बार कौन सी पंचायत आरक्षित होगी और कौन सी ओपन रहेगी। सरकार ने वर्ष 2010 के चुनाव को आधार बनाने को कहा है साथ ही यह निर्णय लिया है कि दो बार आरक्षित रही पंचायतों को अबकी बार ओपन किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद पंचायती राज विभाग ने तेजी अपनाई है और चुनावी रोस्टर को तैयार करने में जुटा है।
दूसरी तरफ नई पंचायतों के गठन को लेकर ऊहापोह की स्थिति चल रही है। वर्तमान में सरकार ने जो नई पंचायतों का गठन किया है, उसके तहत प्रदेश में पंचायतों की संख्या 3700 से अधिक हो जाएगी।
पहले सरकार ने 93 पंचायतों के प्रस्ताव पारित किए थे। उसके बाद 41 नई पंचायतों के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। पिछले कल भी 61 नई पंचायतों को मंजूरी प्रदान की गई है। पहले पंचायतों की कुल संख्या 3577 थी। नई पंचायतों के प्रस्ताव आने के बाद पंचायतों की कुल संख्या 3700 से अधिक होगी। हालांकि अभी पंचायती राज विभाग की ओर से आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं, उसके बाद नई पंचायतों के संबंध में अंतिम अधिसूचना जारी होगी, तभी पंचायतों का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा। अभी पंचायतों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। सरकार आए दिन नई पंचायतों को लेकर अपनी मंजूरी प्रदान कर रही है और यह सिलसिला 18 मार्च तक जारी रहेगा। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 21 मार्च तक का समय है, 18 मार्च तक नई पंचायतों को लेकर निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद आपत्तियां व सुझाव लेने के लिए तीन दिनों का समय दिया जाएगा। इस पूरे मामले पर राज्य चुनाव आयुक्त के साथ भी चर्चा हो चुकी है।

