-तीन से पांच लाख में बेचे प्रश्नपत्र
-आरोपितों के खातों में स्थानांतरित किए 1.25 करोड़
-जांच के दौरान चूक व लापरवाही के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश
सीबीआइ ने हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2022 के प्रश्न पत्रों के लीक होने से संबंधित मामलों में 88 आरोपियों के खिलाफ दो आरोप पत्र दायर किए हैं। 27.03.2022 को आयोजित पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2022 के प्रश्नपत्रों के लीक होने से संबंधित मामलों की चल रही जांच में 88 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने सोमवार को शिमला में सक्षम न्यायालय के समक्ष दो आरोप पत्र दायर किए। इसके अलावा जांच के दौरान रिकार्ड में आई चूक व लापरवाही के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
सीबीआइ जांच और दायर किए गए आरोप पत्रों के तहत दो आरोपियों (बिहार के निवासी) ने अन्य आरोपी व्यक्तियों के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र को चुराने व दुरुपयोग करने की साजिश रची। आरोपी व्यक्तियों के खातों में 1.25 करोड़ स्थानांतरित किए गए। पेपर लहक मामले की जांच में पेपर लीक होने में बिहार, यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा स्थित संगठित समूहों की सांठगांठ का खुलासा हुआ। इस दौरान विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से मंडी, कांगड़ा, चंडीगढ़, पंचकुला, ज़ीरकपुर, मोहाली, आदि में तीन से पांच लाख रुपये में उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र दिए गए। सीबीआइ को मामला सांपे जाने के बाद सीबीआइ ने पुलिस स्टेशन गग्गल की एफआईआर संख्या 41 05.05.2022 और पुलिस स्टेशन सीआईडी, शिमला की एफआईआर संख्या 05 07.05.2022 के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज दो मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली थी। भारतीय रेलवे, शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश से संबंधित तत्कालीन लोक सेवकों की भूमिका, हिमाचल प्रदेश के जेई और जेओए (बिजली बोर्ड), चंडीगढ़ पुलिस के तत्कालीन कांस्टेबल, दिल्ली सरकार के तत्कालीन अधिकारी, एक पूर्व सैनिक और तत्कालीन रक्षा लेखा और अधिकारी की भूमिका जांच के दौरान सामने आइ है।
पेपर लीक में शामिल संस्थाओं के नाम भेजे जा रहे एनटीए को
जांच में भी पाया गया कि नालंदा (बिहार), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश), रोहतक (हरियाणा), दिल्ली और जम्मू में विभिन्न निजी संस्थान चलाने वाले व्यक्तियों ने मिलीभगत की और उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। उचित कार्रवाई के लिए संस्थानों के नाम एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) को भेजे जा रहे हैं क्योंकि जांच के दौरान उनकी भूमिका भी रिकार्ड में आई है।
जनता को याद दिलाया जाता है कि उपरोक्त निष्कर्ष सीबीआई द्वारा की गई जांच और उसके द्वारा एकत्र किए गए सबूतों पर आधारित हैं। भारतीय कानून के तहत, आरोपियों को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि निष्पक्ष सुनवाई के बाद उनका अपराध साबित नहीं हो जाता।

