आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला। विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों में अध्यक्षों व उपाध्यक्षों का कैबिनेट रैंक समाप्त। इनके वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर, 2026 तक स्थगित रहेगा। फैसला तुरंत लागू होगा। वर्तमान में कैबिनेट दर्जा प्राप्त हो 2.50 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है। सरकार की घोषणा के मुताबिक मासिक 20 हजार रुपये वेतन में कटौती की गई है और 2 लाख मासिक वेतन मिलेगा। हिमाचल सरकार में नंद लाल, आरएस बाली, भवानी सिंह पठानिया, सुनील कुमार बिट्टू, नरेश चौहान, केहर सिंह खाची व गोकुल बुटेल को कैबिनेट रैंक मिला है। इस फैसले को खर्चों पर नियंत्रण के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल का राजस्व घाटा अनुदान बंद किया है, प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कैबिनेट रैंक समाप्त किया है। आने वाले दिनों में खर्च कम करने के लिए और फैसले लिए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव कुलविंद्र सिंह कंवर की ओर से इस आशय की अधिसूचना जारी की गई।
कैबिनेट रैंक प्राप्त को 5 कर्मचारियों के स्टाफ की सुविधा
मंत्रियों के अतिरिक्त सरकार द्वारा नियुक्त कैबिनेट रैंक प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति को 5 कर्मचारियों का स्टाफ मिलता है। इसके अतिरिक्त वाहन को प्रदेश में लेकर जाने की असीमित सुविधा प्राप्त रहती है। कैबिनेट रैंक के अनुसार ये फाच्र्यूनर वाहन की पात्रता प्राप्त रहती है। प्रदेश में दौरा करने के दौरान टीए व डीए भी नियमानुसार प्राप्त करते हैं।
प्रोटाेकाल सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार ने निर्णय
राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रोटोकाल को सुव्यवस्थित करने के लिए कैबिनेट रैंक का दर्जा वापस लिया। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने विभिन्न प्राधिकरणों को दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ के दर्जे को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसमें बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी चेयरमैन तथा प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं। यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकाल को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही इन पदों को दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ से संबंधित सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों के वेतन और मासिक भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर, 2026 तक स्थगित रहेगा। इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि इस निर्णय को शीघ्रता से लागू किया जा सके और उनके अधीन सभी विभागों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
वित्तीय स्थिति देखकर वेतन बढ़ा सकते हैं
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सार्वजनिक उपक्रमों में अध्यक्ष व उपाध्यक्षों के वेतन के संबंध में निर्देश दिए थे कि जिन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति ठीक है, वे मासिक वेतन अपने स्तर पर निर्धारण कर सकते है। निगम-बोर्ड के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को मासिक 30 हजार रुपये वेतन मिलता है।



