प्रदेश सरकार राज्य में अनियोजित निर्माण पर लगाम लगाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाने जा रही है। इसके तहत पंचायतों में नो कंस्ट्रक्शन जोन तय किए जाएंगे, जबकि शिमला के ऐतिहासिक जाखू हिल्स क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का ध्येय है कि सुरक्षित व योजनागत विकास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि एनएचएआइ व एनएच के आसपास निर्माण संबंधी नियमों पर प्रदेश में पूरी तरह से काम नहीं हो रहा है। प्रदेश सरकार संपर्क सड़कों से एक मीटर की दूरी पर ही निर्माण कार्यों को अनुमति देगी। इस संबंध में टीसीपी विभाग को फाइल पर पूरा प्रारूप तैयार कर भेजने के लिए कहा गया है।
ग्राम पंचायतों में नो कंस्ट्रक्शन जोन होंगे
अब भूस्खलन और धंसाव संभावित इलाकों की पहचान कर मानचित्र तैयार किए जाएंगे। इन संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सड़कों से एक मीटर की दूरी तक मकान बनाने की अनुमति नहीं होगी। शिमला के जाखू हिल्स में निर्माण पर रोक के साथ-साथ निजी प्लॉट धारकों को सरकार को अपनी जमीन बेचने का विकल्प दिया जाएगा।
हर शहर में अर्बन फारेस्ट
हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) बढ़ाने के लिए प्रत्येक शहर में उपयुक्त भूमि चिह्नित कर अर्बन फारेस्ट विकसित किए जाएंगे। प्राकृतिक नालों और वन क्षेत्रों को बचाते हुए केवल सुरक्षित व वैज्ञानिक तरीकों से ही निर्माण की अनुमति दी जाएगी। सरकार का मकसद विकास को रोकना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और टिकाऊ नियोजन के जरिए आपदा के जोखिम को कम करना और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

