चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार को खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में भारी सुस्ती दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष के सात महीने बीत जाने और आठवें महीने के जारी रहने के बावजूद खनन गतिविधियों से अब तक केवल 170 करोड़ रुपये का राजस्व ही एकत्र हो सका है। सरकार ने इस पूरे वित्त वर्ष के लिए खनन से 350 करोड़ रुपये जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था, लेकिन सुस्त रफ्तार के कारण तय लक्ष्य का 50 प्रतिशत आंकड़ा भी मुश्किल से छू पाया है।
राजस्व संग्रह में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण सरकारी क्षेत्र में ढांचागत और निर्माण परियोजनाओं की धीमी गति रहा है। लोक निर्माण, जल शक्ति और अन्य विकास विभागों में नए बजट आवंटन में देरी और जारी परियोजनाओं में कार्य धीमा रहने से रेत, बजरी, गिट्टी और पत्थरों की मांग बेहद कमजोर रही। खनन पट्टों से मिलने वाली रायल्टी और खनिज ढुलाई से आने वाले शुल्क पर इसका सीधा असर पड़ा।
इसके साथ ही मानसून सीजन के दौरान नदियों और खड्डों में जलस्तर बढ़ने व पर्यावरणीय नियमों के चलते हर साल खनन पर रोक रहती है। इस बार मानसून के प्रभाव के कारण खनन और परिवहन दोनों ही लगभग दो से तीन महीने तक सीमित रहे, जिससे राजस्व संग्रह की गति काफी धीमी पड़ गई।
5 माह में 180 करोड़ जुटाने की चुनौती
वित्त वर्ष समाप्त होने में अब करीब पांच महीने का समय शेष बचा है। 350 करोड़ रुपये का वार्षिक आंकड़ा छूने के लिए खनन विभाग को बचे हुए समय में 180 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र करना होगा।
पिछले सात महीनों में जहां औसत वसूली लगभग 24.3 करोड़ रुपये प्रतिमाह रही। वहीं, अब लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आगामी पांच महीनों में हर माह कम से कम 36 करोड़ रुपये जुटाने होंगे।
मानसून बाद और बजट आवंटन से उम्मीदें
आने वाले महीनों में स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। मानसून सीजन समाप्त हो चुका है और मौसम साफ रहने से खनन पट्टों पर काम सुचारू हो गया है। इसके अलावा, सरकारी विभागों को योजनाओं के लिए नया बजट जारी होने के बाद रुकी हुई सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण कार्यों में गति आएगी। निजी क्षेत्र में भी त्योहारी और सर्दियों के मौसम में आवासीय व व्यावसायिक निर्माण जोर पकड़ता है। ऐसे में निर्माण सामग्री की मांग बढ़ने और अवैध खनन पर निगरानी सख्त होने से शेष अवधि में राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय उछाल आएगा।

