पुलिस भर्ती आवेदनों का आंकड़ा 98 हजार के पार, सर्दियों के कारण अब नहीं बढ़ेगी अंतिम तिथि: सीएम

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प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल (पुरुष एवं महिला) भर्ती को लेकर राज्य लोक सेवा आयोग के पास 1 सितंबर तक 98 हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं। वहीं, आयोग ने पोर्टल न चलने की शिकायतों को तथ्यहीन और अफवाह करार दिया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि अब आवेदन की अंतिम तिथि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, क्योंकि ऐसा करने से पूरी भर्ती प्रक्रिया सर्दियों के कारण छह महीने तक लटक सकती है। मुख्यमंत्री ने सदन में भर्ती से जुड़े आंकड़े रखते हुए बताया कि आयोग ने पोर्टल के ठप होने के दावों को सिरे से खारिज किया है। आयोग ने दो टूक कहा है कि अभ्यर्थियों को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है और पोर्टल बिना किसी तकनीकी दिक्कत के सुचारू रूप से चल रहा है। 31 अगस्त और 1 सितंबर को भी सैकड़ों युवाओं ने बिना परेशानी के फार्म भरे हैं। वर्तमान में रोजाना औसतन 200 से 300 पुरुष और 150 से 200 महिला अभ्यर्थी सफलतापूर्वक आवेदन कर रहे हैं।

सरकार का तर्क है कि नियमों के तहत सभी 12 जिलों में शारीरिक मानक परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षण आयोजित होने हैं। यदि अंतिम तिथि (5 सितंबर 2026) को और बढ़ाया गया, तो आगामी शीत ऋतु (सर्दियों) के कारण ग्राउंड टेस्ट कराना बेहद कठिन हो जाएगा। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया में लगभग छह माह की अतिरिक्त देरी हो जाएगी, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

10 जुलाई को विज्ञापन जारी होने के बाद शुरुआत में करीब 65,000 आवेदन आए थे। 21 अगस्त तक सरकार ने सभी अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में एक वर्ष की एकमुश्त छूट दी। इससे 11,000 नए आवेदन जुड़े और आंकड़ा 77,000 हो गया। 1 सितंबर तक होमगार्ड जवानों को आयु में पांच वर्ष की छूट दी गई और अंतिम तिथि 5 सितंबर तय की गई। इस अवधि में लगभग 21,000 अतिरिक्त आवेदन आए।

कुल आंकड़ा: 1 सितंबर, 2026 की शाम 7:00 बजे तक कुल आवेदनों की संख्या 98,719 तक पहुंच चुकी है।

भाजपा विधायक ने उठाई 5 दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग

सदन में प्रश्नकाल समाप्त होने के तुरंत बाद बड़सर से भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने प्वाइंट आफ आर्डर के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पोर्टल में तकनीकी खामियों और बीच में आई छुट्टियों के कारण कई युवा आवेदन से वंचित रह गए हैं। विधायक ने दावा किया कि जब पोर्टल खुलता है तो कई बच्चों का नाम या नंबर उसमें दर्ज नहीं होता (खुद मुख्यमंत्री भी ऐसे बच्चों से मिले हैं)। लखनपाल ने मांग की कि युवाओं की इस समस्या को देखते हुए आवेदन के लिए पांच दिन का अतिरिक्त समय दिया जाए और पोर्टल को दोबारा खोला जाए।

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