लोकतांत्रिक व्यवस्था में समितियां मिनी सदन की भूमिका निभाती हैं, जहां किसी भी विषय पर गहराई से विचार-विमर्श और सूक्ष्म परीक्षण संभव होता है। यह बात विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने जयपुर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक में कही। उन्होंने कहा कि समिति प्रणाली न केवल सदन का समय बचाती है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया को अधिक विशेषज्ञता पूर्ण और प्रभावी भी बनाती है।
यह बैठक लोकसभा द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की दूसरी बैठक थी, जिसकी अध्यक्षता नरेन्द्र तोमर कर रहे हैं। उन्होंने समिति कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जनसहभागिता बढ़ाने की जरूरत बताई। साथ ही आनलाइन बैठकों, डिजिटल दस्तावेज प्रबंधन और डेटा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी बल दिया। यदि समितियों को सशक्त किया गया तो विधान मंडल अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनकेन्द्रित बन सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति प्रणाली लोकतंत्र की कार्यकुशलता का मजबूत आधार है और इसे और सुदृढ़ करना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में विधेयकों की गहन जांच, नीतियों की समीक्षा और कार्यपालिका पर नियंत्रण में समितियों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने सुझाव दिया कि समितियों की सिफारिशों को अधिक प्रभावी और बाध्यकारी बनाया जाए। सरकार के लिए तय समय सीमा में जवाब देना अनिवार्य हो। महत्वपूर्ण विधेयकों को अनिवार्य रूप से समितियों के पास भेजा जाए और विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और डेटा विश्लेषकों की सहायता उपलब्ध कराई जाए।



