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सरकार ने हिमाचल को आर्थिक दिवालियेपन से बचाने के लिए कडवे घूंट पीने की शुरूआत की

– परिवहन निगम की बसों में पुलिस बल के 15000 कर्मियों को अब 110 रुपये के स्थान पर 300 रुपये मासिक चुकाने होंगे

– फाेरलेन, जल विद्युत परियोजनाओं, सुरंग निर्माण के लिए कैप्टिव खनन 80 रुपये टन से बढ़ाकर 140 रुपये हुआ

– ग्रामीण क्षेत्रों में निश्शुल्क पेयजल एकल नारी, बीपीएल परिवारों को छोड़कर मीटर से शुल्क चुकाना पड़ेगा

– परिवहन निगम के घाटे के 168 रुट निजी क्षेत्र को देने का निर्णय लिया गया

– राज्य की गंभीर आर्थिक स्थिति को लेकर प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने 30 मिनट की प्रस्तुति में वस्तु स्थिति से अवगत करवाया

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के गंभीर वित्तीय हालात का प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने 30 मिनट की प्रस्तुति में राज्य को आर्थिक दिवालियेपन से बचाने के लिए तुरंत सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। ये भी बताया कि राजस्व घाटा अनुदान घटने और जीएसटी मुआवजा धनराशि बंद होने से सरकार का वित्तीय संतुलन गड़बड़ा गया है। राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडलीय बैठक में कडवे घूंट पीने की शुरूआत हुई। सरकार ने निर्णय लिया कि राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में एक छोर से दूसरे छोर तक रियायती दर पर यात्रा करने वाले 15 हजार पुलिस बल को 110 रुपये मासिक शुल्क के स्थान पर अब 300 रुपये मासिक शुल्क चुकाना पड़ेगा।

इस पर मंथन होने के बाद सरकार ने निर्णय लिया है कि अगले माह से पुलिस जवानों के वेतन से नया शुल्क कटेगा। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में घरेलू पेयजल कनेक्शन को निश्शुल्क कर दिया गया था। अब एकल महिला, बीपीएल परिवारों को छोड़कर सभी ग्रामीण उपभोक्ताओं को पानी का बिल चुकाना पड़ेगा। इसके लिए प्रत्येक घर में मीटर लगेगा और मासिक बिल के आधार पर शुल्क देना पड़ेगा। घाटे की दलदल में धंसते जा रहे राज्य पथ परिवहन निगम के 168 घाटे के रूटों को निजी क्षेत्र में देने की स्वीकृति प्रदान की गई, लोकसभा चुनाव से पहले 107 घाटे के रूट पहले की निजी क्षेत्र को दिए जा चुके हैं। आज की मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए निर्णयों से सरकार काे 300 करोड़ से लेकर 500 कराेड़ का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

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